शुक्रवार, 19 जून 2009

गजल 29

देख लीजे जो देखा नहीं
जिंदगी का भरोसा नहीं

गम की शिद्दत उसे क्या पता
दिल कभी जिसका टूटा नहीं

आओगे ख्वाब में किस तरह
मुद्दतों से मैं सोया नहीं

जिसको फूलोसे है उनसियत
वो कभी खार बोता नहीं

देखिये मेरी मजबूरियां
मैं जो चाहूँ वो होता नहीं

आ के साहिल पे क्यों डूबते
नाखुदा जो डुबोता नहीं

छोडिये फ़िक्रे सूदो जियां
इश्क है इश्क , सौदा नहीं

प्यार होता है ख़ुद ही 'मयंक'
प्यार करने से होता नहीं।

6 टिप्‍पणियां:

  1. गम की शिद्दत उसे क्या पता
    दिल कभी जिसका टूटा नहीं

    आओगे ख्वाब में किस तरह
    मुद्दतों से मैं सोया नहीं

    वाह...बहुत खूबसूरत अशआर हैं आपकी ग़ज़ल के...सारे शेर बेहतरीन हैं...बहुत बहुत बधाई...
    नीरज

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  2. आज की गजल का ऐसा कोई शेर नहीं जिसे हल्का कहाँ जा सके हर शेर बहुत खूबसूरत बन पड़ा है
    सुन्दर गजल
    वीनस केसरी

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  3. sahi kaha jabardasti pyar to hota nahi.............100% satya wachan
    pyar hi duniya me bhagwan dwara di gaee nemat hai...

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  4. आओगे ख्वाब में किस तरह
    मुद्दतों से मैं सोया नहीं


    --बहुत उम्दा!

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  5. आओगे ख्वाब में किस तरह
    मुद्दतों से मैं सोया नहीं

    Behtareen.....bahut hi khoobsoorat gazal....badhai.

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